HomebollywoodDr. Vikas Divyakirti : ये वो शख्स हैं जिनकी कीर्ति वास्तव में...

Dr. Vikas Divyakirti : ये वो शख्स हैं जिनकी कीर्ति वास्तव में दिव्य

मैं जब भी पीछे पलट कर देखता हूं तो पाता हूं कि अपने स्कूली दिनों में डॉ. रवि शुक्ला सर को छोड़कर शायद ही कोई टीचर रहा हो जो मुझे पसंद हो या फिर मुझे उनके पढ़ाने का अंदाज पसंद आया हो। मुझे बहुत कम क्लासेज याद आते हैं, जिन्हें मैंने बहुत चाव से सुना हो। लॉक डाउन के दिनों में सोशल मीडिया पर Dr. Vikas Divyakirti को सुनना हुआ। उनकी क्लासेज़ देख-सुन कर मैंने कई दफा सोचा है कि हम क्यों न इनके विद्यार्थी हुए। अपने विषय पर ऐसी पकड़ होना, अद्भुत हैं। हल्के-फुल्के वातावरण में एकदम मित्रवत् ढंग से पढ़ाने वाले विकास दिव्यकीर्ति की कक्षाओं में कुछ विशिष्ट जोड़ने-घटाने की जरा-सी भी अतिरिक्त चेष्टा नहीं दिखती। उनकी सहजता का कायल हो गया मैं। पिछले महीने ’12th फेल’ के प्रमोशन के दौरान विकास दिव्यकीर्ति जी से मुलाकात हुई और साक्षात्कार करने का मौका मिला। क्या ही अनुभव था वह। इतना जहीन व्यक्तित्व का मालिक होना, वर्तमान दौर में कितना संभव ही नहीं। कोई ऐसा विषय नहीं जिस पर पकड़ न हो। कोई दर्शन नहीं जो उनसे अछूता हो। इन सबके बाद भी इतना सहज और सौम्य की मन मोह लें। साक्षात्कार के अंश पढ़िए और जानिए उस शख्स को जिनका पढ़ाना जितना सरल हैं उतना ही उनका व्यक्तित्व।

12th फेल किताब की पृष्ठभूमि कैसे बनी ?

A: मनोज, श्रद्धा और अनुराग मेरे स्टूडेंट्स रहे हैं। यह मेरे काफी क्लोज हैं। मैं मनोज और श्रद्धा को तो उनके स्ट्रगल के दिनों से ही जानता हूँ और हम काफ़ी मिलते भी रहते हैं। 2019 में अनुराग ने मुझे बताया कि वो एक नॉवेल लिख रहे हैं मनोज और श्रद्धा की कहानी पर। फिर एक दिन तीनों मुझसे मिलने आए (मनोज, श्रद्धा और अनुराग) और उन्होंने कहा कि जब यह नॉवेल पूरी हो जाएगी तब मुझे उसे एडिट करना होगा। मैंने उनकी इस बात में हामी भर दी। फिर मई 2019 में मुझे वो नॉवेल मिली। हमने ‘व्हाट्सएप’ पर एक ग्रुप बनाया जिसमें हम चार लोगों के अलावा मेरी पत्नी भी शामिल थी। फिर जब यह नॉवेल पब्लिश हो गई तो हमने एक सेमिनार करवाया ‘दृष्टि’ में बच्चों को उनसे मिलवाने के लिए और उन्हें इस नॉवेल के बारे में बताने के लिए। इससे पहले हमने ‘दृष्टि’ में कभी किसी बुक को प्रमोट नहीं किया था। नॉवेल के पब्लिशर डरे हुए थे। वो इस नॉवेल की सिर्फ एक हज़ार कॉपी ही छापना चाहते थे लेकिन मेरे कहने पर पचास हज़ार कॉपी छापी गयी। फ़िलहाल तीन लाख लोग इस नॉवेल को खरीद चुके हैं।

12th फेल किताब ने एक फिल्म का रूप कैसे लिया ?
A: कोविड में इस नॉवेल को कई फिल्म मेकर्स ने पढ़ा और उनमें से एक दो ने मनोज को एप्रोच भी किया था। इन सभी में से विधु सर इसको लेकर सबसे ज्यादा सीरियस थे। उन्होंने यह फैसला किया कि वो इस कहानी पर फिल्म बनायेंगे। पहले उन्होंने नॉवेल के लेखक अनुराग पाठक से बात की। फिर रिसर्च के दौरान विधु सर को ऐसी जरुरत महसूस हुई कि उन्हें UPSC के बारे में थोड़ा जान लेना चाहिए। इसके बाद अनुराग ने विधु सर की बात मनोज तक पहुंचाई। फिर मनोज ने मुझे कॉल किया और बताया कि विधु सर आपसे बात करना चाहते है, आप उनसे बात कर लेंगे? मैंने मनोज से कहा कि क्या बात कर रहे हो। मन ही मन मैंने सोचा जिसका सपना रहा हो फिल्म मेकिंग का वो विधु विनोद चोपड़ा से बात क्यों नहीं करेगा? शाम को हमारी वीडियो कॉल पर काफी लंबी बात हुई और मुझे फिल्म में स्क्रिप्ट कंसलटेंट की भूमिका दी गई। मेरा काम इसमें सिर्फ यह देखना था कि फिल्म की स्क्रिप्ट में सब कुछ ऑथेंटिक है या नहीं।

विधु सर से आप पहली बार कब मिले थे ?
A: सर से पहली बार मैं लोनावला में उनके फार्म हाउस पर मिला था। लोनावला में हम एक हफ्ते साथ में रहे थे। इसी मीटिंग के दौरान फिल्म की स्क्रिप्ट को री राइट करने की बात तय हुई। री राइटिंग के कारण काम बढ़ गया और मुझे दिल्ली लौटना पड़ गया। उस वक़्त कोविड चल रहा था। क्लासेज ज्यादा थी नहीं। मेरे पास समय था। मैं रोज़ रात के दो-तीन बजे तक बैठकर फिल्म के डायलॉग लिखता था। फिल्म के तीस सीन्स मेरे द्वारा लिखे गए हैं। इसके बाद का सारा काम जस्सी, आयुष और विधु सर ने किया क्योंकि कोविड ख़त्म होने के बाद क्लासेज शुरू हो गए थे और मैं वहाँ बिजी हो गया।
इंटरव्यू के सीन्स मेरे द्वारा लिखे गए हैं। दिल्ली में क्लासेज के कारण मुझे मौका मिल नहीं पाता था, तो उसे पूरा करने के लिए मैंने एक हफ्ते के लिए मुंबई आया था और एक होटल में रुक कर तीन दिन में मैंने इंटरव्यू का सीन पूरा कर दिया। इसके बाद विधु सर मुझे लोनावला ले गए और वह हमने इंटरव्यू वाले सीन को भी फाइनल कर दिया। फिल्म की शूटिंग पहले कर्जत में होने वाली थी लेकिन मुखर्जी नगर देखने के बाद उन्होंने यह फैसला किया कि वो फिल्म की शूटिंग यहीं करेंगे।

आपने बताया कि फिल्म मेकिंग आपका शौक है। अगर आपको फिल्म बनाने का मौका मिले तो आप किस तरह की फिल्म बनाना पसंद करेंगे?

A: मैं 20-25 साल से फिल्म बनाने का उद्देश्य रखता हूँ। जब मैं विद्यार्थी था तब भी मेरे मन में था कि मैं मीडिया की क्षेत्र में कुछ करूं। उस समय प्रसिद्ध होने के लिए और अपनी बात लोगों तक पहुँचाने के लिए फिल्म ही एकमात्र जरिया था। शायद इस वजह से मैं इस क्षेत्र में हाथ आज़माने की सोच रहा था।
1990 के दशक में भारत में कई प्राइवेट टीवी चैनल लांच हुआ। मुझे मशहूर पत्रकार विनोद दुआ की टीम और एक दो न्यूज़ चैनल से नौकरी का प्रस्ताव भी आया था। लेकिन उस वक़्त क्योंकि मैं तैयारी कर रहा था तो मैं वो जॉब नहीं कर पाया। पढाई खत्म करने के बाद मैंने नौकरी की, दिल्ली यूनिवर्सिटी में पढ़ाया, अपना खुद का संसथान शुरू किया पर कहीं न कही मुझे ऐसा लगता था कि इस पेशे के जरिए अपनी बात बहुत दूर तक पहुंचना संभव नहीं है। फिल्म मेकिंग को मैंने अपने दिमाग से कभी निकलने नहीं दिया था। मुझे आदत है अपने फ़ोन में नोट्स बनाने की। मैं अपने फोन में अब तक 700-1000 आइडियाज नोट करके रखा चुका हूँ। इसमें कुछ फिल्म की कहानी है, कुछ डायलॉग्स हैं। कभी ट्रेन में ट्रेवल करते वक़्त कुछ दिलचस्प हो गया तो उसे भी मैंने नोट कर लिया यह सोच कर कि इसे अपनी फिल्म में इस्तेमाल करूँगा। ये चीजें मैं 30 सालों से करता चला आ रहा हूँ। यह जानते हुए कि मैं शायद फिल्म कभी न बना पाऊं लेकिन मेरे यह मानना है कि तैयारी करते रहनी चाहिए। जब मौका मिलेगा तब देखेंगे। 12 फेल रिलीज़ होने के बाद मैं फिल्म मेकिंग पर विचार कर रहा हूँ। मैं एक ऐसी फिल्म बनाना चाहता हूँ जिसका बजट भी बहुत ज्यादा नहीं हो और वो हमारे समाज को एक मैसेज भी दे। मुझे 3 इडियट्स, लंच बॉक्स, गुलाल और न्यूटन जैसी फिल्में पसंद हैं।

आप सोशल मीडिया पर काफी पॉपुलर हैं, इसे एक बड़े स्केल पर करने का विचार कैसे आया ?

A: हमने 2017 में अपना यूट्यूब चैनल शुरू किया था। इससे पहले मैं 2011 में ऑनलाइन क्लास भी ले चुका था। 2011 और 2013 के बीच मैंने यह फैसला किया कि अब मैं फिलॉसफी और हिंदी साहित्य नहीं पढ़ाऊंगा क्योंकि मैं उन दोनों सब्जेक्ट से ऊब चुका था। लेकिन बच्चे जिद करने लगे कि उन्हें मुझसे ही पढ़ना है। तो मैंने उन्हें एक ऑप्शन दिया कि मैंने जो आखिरी क्लास पढ़ाई है उसकी रिकार्डेड लेक्टर्स उपलब्ध हैं, आप चाहे तो उसे देख सकते हैं। मैं बीच में आकर डाउट दूर कर दिया करूँगा। मुझे लगा था कि इसमें स्टूडेंट्स इंटरेस्टेड नहीं होंगे लेकिन हैरानी की बात यह है कि वो रिकार्डेड लेक्टर्स इतना चला कि आज भी स्टूडेंट्स मेरे वो लेक्चर्स देखते हैं और मैं बीच में जाकर उनके डाउट दूर कर देता हूँ। इससे मुझे यह समझ आ गया था कि अगर कंटेंट अच्छा हो तो यह मैटर नहीं करता है कि आप सामने खड़े होकर पढ़ा रहे है या नहीं। फिर 2018 में मैंने GST पर एक वीडियो बनाया। इस वीडियो में मैंने GST को बेहद सरल भाषा में समझाया था। यह वीडियो 4. 30 घंटे का था तो मेरी टीम ने इस वीडियो को तीन हिस्सों में यूट्यूब पर अपलोड किया। मेरा अनुमान था कि मेरे उस वीडियो को ज्यादा से ज्यादा एक-दो हज़ार लोग देखेंगे। मेरी टीम वीडियो अपलोड करने के बाद भूल गयी। दस दिन बाद पता चला कि उस वीडियो पर पांच हज़ार व्यूज आ चुके हैं। कुछ दिन बाद देखा तो व्यूज और ज्यादा बढ़ गए थे। फिर एक दिन मुझे मेरे स्टूडेंट्स का कॉल आया जो GST में काम करते हैं। वो मुझे थैंक यू कहने लगे। वजह पूछने पर उन्होंने मुझे बताया कि उन्होंने मेरा GST पर बनाया वीडियो देखा और मेरे उस वीडियो ने उनके काम को काफी आसान कर दिया है। फिर कोविड आ गया। सब लोग घर में कैद हो गए थे। इस दौरान हमने अपने चैनल पर तेजी से वीडियो पोस्ट करना शुरू कर दिया। वीडियो पर रिस्पांस भी बहुत अच्छे आ रहे थे। फिर कोविड की दूसरी वेव में मैं भोपाल गया हुआ था। वहाँ एक पेट्रोल पंप पर कुछ लोगों ने मुझे पहचान लिया। मैंने उनसे पूछा कि आप दृष्टि में पढ़ते हैं उन्होंने कहा नहीं ? फिर मैंने पूछा आप स्टूडेंट्स हैं उन्होंने जवाब दिया नहीं? तो मैंने उनसे पूछा कि फिर आप लोग मुझसे कैसे जानते हैं, उन लोगों ने मुझे बताया कि हम आपकी वीडियोस देखते हैं यूट्यूब पर। उस दिन मुझे यूट्यूब की ताकत का अंदाज़ा हुआ। इसके बाद मैंने यह नोटिस किया कि अगर मैं कहीं चले जाऊं तो कुछ लोग मुझे मेरे काम के कारण पहचान लेते हैं।

आप मुंबई पहली बार कब आए थे और कोई ऐसी घटना जो आप साझा करना चाहेंगे ?

A: मैं 10वी क्लास में था तब मैं पहली बार मुंबई आया था। मुंबई के गोरेगांव इलाके में मेरी मम्मी की मौसी रहती थी। मुझे उस वक़्त यह नहीं पता था कि गोरेगांव में ही ‘फिल्म सिटी’ बसा हुआ है। मुंबई आने के बाद जो एक दिलचस्प चीज़ मेरे साथ घटी वो यह थी कि मुंबई सेंट्रल स्टेशन के बाहर हमने उस दौर के पॉपुलर टीवी सीरियल के एक एक्टर को देख लिया। दरअसल मुंबई पहुँचने के एक दो दिन बाद मैं अपने दोनों भाइयों के साथ मुंबई सेंट्रल स्टेशन गया था गोवा की टिकट बुक करने के लिए। टिकट बुक करने के बाद जब हम स्टेशन के बाहर आये तो हमें एक मारुती वैन चलाते हुए नज़र आए ‘नुक्कड़’ सीरियल में करीम मियां का किरदार निभाने वाले अभिनेता जावेद खान अमरोही। उन्हें ऐसे अचानक देखने के बाद हम तो पागल हो गए। इसके बाद हम पूरे दिन स्टेशन के बाद खड़े रहे इस उम्मीद में कि शायद कोई और एक्टर हमें नज़र आ जाए लेकिन दुर्भाग्यवश करीम साहब के अलावा हमने कोई और नज़र नहीं आया।

क्या देश के और भी हिस्सों में दृस्टि IAS की स्थापना होगी?

A: 2019 तक हमने दृस्टि की कोई नयी शाखा नहीं शुरू की थी। 20 साल तक हमने दिल्ली के मुखर्जी नगर में ही काम किया। फिर हमारी टीम के साथ कई लोग जुड़े और उनका मानना था कि हमें दॄष्टि को एक्सपैंड करना चाहिए। 2019 में हमने विस्तार शुरू किया और मुखर्जी नगर के बाद प्रयागराज में दॄष्टि IAS की दूसरी शाखा शुरू की। इसके बाद 2021 में जयपुर, 2023 में दिल्ली के करोलबाग और लखनऊ में दृस्टि IAS की स्थापना हुई। फ़िलहाल इंदौर और पटना में दृस्टि IAS को शुरू करने का काम चल रहा है।

RELATED ARTICLES

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

Most Popular

Recent Comments