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Pankaj Udhas: शांत हुई दिलकश आवाज़, गजलों के बादशाह पंकज उधास का निधन

Pankaj Udhas: पंकज उधास को गजलों का बादशाह कहा जाता है। उनका जन्म 17 मई 1951 को जेतपुर, गुजरात में हुआ था। ग़ज़ल को महत्वपूर्ण बनाने में उनका बड़ा योगदान है। उनकी कई गजलें फैंस के दिलों को छू जाती हैं। आज उनकी मौत ने सभी को झकझोर कर रख दिया है।

पंकज उधास ने अपनी मधुर आवाज से दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया है। फिल्म ‘नाम’ में उनका गाया गाना ‘चिट्ठी आई है’ आज भी लोकप्रिय है। ग़ज़ल के दिल को छूने वाली जादुई आवाज़ आज ख़ामोश है। उनके निधन से देश ने एक महान गीतकार खो दिया है।

कौन थे पंकज उधास

पंकज उधास का जन्म गुजरात के जेतपुर में हुआ था। उनके माता-पिता केशुभाई उधास और जितुबेन उधास हैं। उन्होंने सर बीपीटीआई भावनगर से पढ़ाई की। बाद में वह मुंबई आ गए और अपनी आगे की शिक्षा सेंट जेवियर्स कॉलेज, मुंबई से की।

पंकज उधास का पहला ग़ज़ल एल्बम आहट 1980 में रिलीज़ हुआ था। इससे उन्हें सफलता मिलने लगी और 2011 तक उन्होंने 50 से अधिक एल्बम और सैकड़ों संकलन एल्बम जारी किए। 1986 में ‘उधास’ को फिल्मों में अभिनय करने का एक और मौका मिला। 1990 में, उन्होंने फिल्म घायल के लिए लता मंगेशकर के साथ मधुर युगल गीत “माहिया तेरी कसम” गाया। इस गाने को काफी लोकप्रियता मिली। 1994 में, उधास ने साधना सरगम के साथ फिल्म मोहरा का उल्लेखनीय गीत “ना कजारे की धार” गाया जो बहुत हिट हुआ। उन्होंने साजन, ये दिल्लगी, नाम और फिर तेरी कहानी याद आई जैसी फिल्मों में पार्श्व गायक के रूप में काम करना जारी रखा। दिसंबर 1987 में म्यूजिक इंडिया द्वारा लॉन्च किया गया उनका एल्बम शगुफ्ता, भारत में कॉम्पैक्ट डिस्क पर रिलीज़ होने वाला पहला एल्बम था।

पंकज उधास के पिता एक किसान थे। उनके बड़े भाई मनहर उधास और निर्मल उधास बॉलीवुड में लोकप्रिय गायक हैं। दोनों भाइयों की वजह से ही पंकज उधास में संगीत के प्रति रुझान पैदा हुआ और उन्होंने इस क्षेत्र में अपना करियर बनाने का फैसला किया। उन्होंने शास्त्रीय संगीत की पढ़ाई की है। पंकज उधास को पहली बार गाने का मौका 1972 में रिलीज हुई फिल्म ‘कामना’ में मिला। हालांकि फिल्म बॉक्स ऑफिस पर फ्लॉप हो गई लेकिन उनके गाए गाने को काफी सराहना मिली। इसके बाद उन्होंने ग़ज़ल गाना शुरू कर दिया।

‘चिट्ठी आई है’ गाने ने मेरी जिंदगी बदल दी

फिल्म ‘नाम’ 1986 में रिलीज हुई थी। इस फिल्म का गाना ‘चिट्ठी आई है’ काफी पॉपुलर हुआ था। इस गाने ने उन्हें एक अलग पहचान दी। इस गाने को आनंद बख्शी ने संगीत दिया था। फैंस इस गाने के दीवाने हो गए थे। आज भी ये गाना चाव से सुना जाता है। इस गाने ने पंकज उधास की जिंदगी बदल दी।

अपनी जादुई आवाज से दशकों तक प्रशंसकों के दिलों पर राज करने वाले गजल गायक पंकज उधास का लंबी बीमारी के बाद आज निधन हो गया। वह 72 वर्ष के थे। उनके निधन की जानकारी परिवार ने दी। पंकज उदास के गाए कई गाने, गजलें आज भी संगीत प्रेमियों की जुबान पर हैं। उनके निधन पर फिल्म इंडस्ट्री और म्यूजिक इंडस्ट्री दुख व्यक्त कर रही है। उन्होंने आज सुबह 11 बजे ब्रीच कैंडी अस्पताल में अंतिम सांस ली. पिछले कुछ दिनों से उनका ब्रीच कैंडी अस्पताल में इलाज चल रहा है। सूत्रों के मुताबिक, पंकज उधास के पार्थिव शरीर का अंतिम संस्कार मंगलवार को किया जाएगा।

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