मशहूर गायक और लेजेंडरी गज़ल गायक पंकज उधास आज दुनिया को आखिरी अलविदा कर गए।

पंकज उधास को उनकी सुरीली आवाज में गाई गई गजलों और गानों की बदौलत देश ही नहीं ग्लोबली प्रशंसा मिली।

गजल गायक के रूप में उनको मिली सफलता के बाद पंकज उधास ने बॉलीवुड के मशहूर डॉयरेक्‍टर महेश भटृ की नाम फिल्‍म में 1986 में "चिट्ठी आई है...गाकर तहलका मचा दिया।

पंकज उधास ने 1988 में आई सुपरहिट फिल्‍म एक ही मकसद में चाँदी जैसा रंग है तेरा सोने जैसे बाल, एक तूही धनवान है गोरी बाकी सब कंगाल ... ने तो तहलका मचा दिया था।

1994 में रिलीज हुई मोहरा फिल्‍म का गाना न कजरे की धार न मोतियों का हार.... पंकज उधास का वो गाना है जो आज भी संगीत प्रमियों की जुबान पर चढ़ा हुआ है।

बाजीगर फिल्‍म का छुपाना भी नहीं आता... जय विक्रांता फिल्‍म का रिश्‍ता तेरा मेरा सबसे ... समेत और ना जानें कितने गाने और नायाब गज़ले पंकज उदास अपने पीछे छोड़ गए है जो संगीत प्रेमियों के दिल में सदा के लिए उनकी आवाज के साथ जिंदा रहेंगी।

पंकज उधास ने महज छह साल की उम्र संगीत की दुनिया में कदम रखा था। 1980 में आहट नाम के गज़ल एलबम से पंकज उधास ने अपने करियर की शुरू की थी। इसके बाद उन्‍होंने 1981 में मुकरार , 1982 में तरन्नुम और इसके बाद महफिल समेत कई अलबम किए जिससे उन्‍हें बतौर गज़ल गायक प्रसिद्धि मिली।